5 अगस्त बस पांच नहीं यह पंचामृत कहलाएगा,
रामायण फिर से राम मंदिर पर लिखा जाएगा
जितना समझ रहे हैं उतना यह भूमि पूजन आसान न था
इसके खातिर ना जाने कितने माताओं का दीप बुझा
गुमबज पर चढ़कर कोठारी बंधुओं ने गोली खाई थी
नाम सैकड़ों गुमनाम है जिन्होंने जान लगाई थी
5 अगस्त के खातिर 500 वर्ष तक संघर्ष किया
कई पीढ़ियां खपी तो खपी आगे भी जीवन उत्सर्ग किया
राम हमारे लिए नहीं बस इतने ही राम तुम्हारे हैं
जो राम ना समझ सके वह सचमुच किस्मत के मारे हैं
प्रार्थना है सबसे बस दीपक एक जला देना
5 अगस्त के भूमि पूजन में अपना प्रकाश पहुंचा देना
नहीं जरूरत आने की बस इतनी ही उपस्थिति काफी है
राम नाम का दीप जला तो कुछ चूक भी हो तो माफी है
कविता नहीं है सीधे-सीधे राम भक्तों का निमंत्रण है
सनातनी कहलाने का समझो कविता अमंत्रण है
चिरंतन नमन वीरगति धारकों कार सेवकों का अभिनंदन है
जग प्रसिद्ध वनवासी राम जय श्री राम जय श्री राम
साभार
अपूर्व शुक्ल
वरिष्ठ समाजसेवी